गीता जयंती आगामी २३ दिसंबर २०२३ श्रीमद्भगवद्गीता के अवतरण का शुभ दिन है। आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने आज से लगभग ५ हजार वर्ष पूर्व अर्जुन को वैदिक ज्ञान का सार प्रदान किया था और उन्हें जीवन के अंतिम लक्ष्य के बारे में बताया था। गीता माहात्म्य में आदि गुरु शंकराचार्य ने स्पष्ट रूप से बताया है; गीता शास्त्रं इदं पुण्यं यः पठेत् प्रयतः पुमान् । विष्णोः पादं अवाप्नोति भय शोकादि वर्जितः ।। भगवद्गीता दिव्य साहित्य है। जो इसे ध्यानपूर्वक पढ़ता है और इसके उपदेशों का पालन करता है, वह भगवान् विष्णु का आश्रय प्राप्त करता है जो कि समस्त भय तथा चिंताओं से मुक्त है। इस्कॉन संस्थापक-आचार्य, श्रील प्रभुपाद ने भगवद गीता को एक विद्वतापूर्ण लेकिन सरल भाषा में प्रस्तुत किया है और इसे न केवल भारत में अपितु विश्व के सभी राष्ट्रों में इसे प्रचारित किया । यह दुनिया में गीता का सबसे अधिक बिकने वाला संस्करण है। श्रील प्रभुपाद ने इस अतुलनीय उपहार को सभी को वितरित करने पर भी जोर दिया है, यहाँ तक हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी इस दिव्य साहित्य को सभी देशों में उपहार स्वरूप दे...