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शिवजी का प्राकट्य

प्रायः ऐसा देखा जाता है जब दो लोग आपस में इस बात को लेकर झगड़ते हैं की शिवजी बड़े हैं के विष्णु जी बड़े हैं? और बड़े आश्चर्य की बात यह  है की दोनो को भी नहीं पता होता है कि वास्तविकता क्या है। जब भगवान श्री कृष्ण ने 3 विष्णु (कर्णोकदशायी, गर्भोदशायी, क्षीरोकदशायी) की उत्पत्ति की और उसके पश्चात कर्णोकदशायी विष्णु के द्वारा ब्रह्मंड के प्रथम जीव ब्रह्मा जी की उत्पत्ति की और उन्हें सृष्टि को सृजित करने का कार्य सौपा तो सर्वप्रथम उन्होंने चार कुमार (सनक, सनातन, सनन्दन और सनत कुमार) की उतपन्न कर उन्हें सृष्टि को आगे बढ़ाने का कार्य सौपा पर ये चार कुमार जन्म से ही ब्रहमचर्य की इच्छा को प्रकट कर और भगवान् विष्णु के प्रति अपने मन को आकर्षित देख अपने पिता ब्रह्मा जी को मना कर देते हैं।  ब्रह्मा जी यह सुनकर अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं और इस प्रकार उनके क्रोध से भौहो के द्वारा एक ऐसे बालक का जन्म होता हैं जो स्वयं ब्रह्मा जी से अपने बारे में पूछता है और फिर ब्रह्मा जी उनको अलग-अलग १२ रुद्रों के नाम बताते हैं और उनका नामकरण शिव जी के रूप में करते हैं।  रूद्र का अर्थ रुदन या क्रोध ...