चातुर्मास जो भक्ति के लिए बहुत ही अनुकूल माना जाता है और ऐसा सभी ग्रंथों में इसका प्रमाण मिलता है की यदि व्यक्ति चातुर्मास का थोड़ा भी नियम पालन करके भक्ति में दृढ़ता से आगे बढ़ता है तो निश्चित रूप से उसकी प्रगति होती है। पर यदि कोई चातुर्मास व्रत का पालन कर पाने में असमर्थ है तो उसके लिए कार्तिक मास जो सभी महीनो में (चातुर्मास का अंतिम महीना ) सबसे दिव्य माना जाता है और पद्म पुराण में श्री नारद मुनि और सत्यव्रत मुनि के संवाद से इसकी दिव्यता का पता चलता है कि किस प्रकार यदि व्यक्ति इस पवित्र महीने में श्री यशोदा दामोदर को दीप - दान करने से उसके सभी पापों का नाश हो जाता है और अंततोगत्वा भगवान् के धाम को प्रवेश मिलता है। उसमें भी यदि कोई आलस्य करता है और कार्तिक व्रत का पूर्ण रूप से पालन नहीं करता तो उसके लिए भीष्म पंचक व्रत का एक विशेष अवसर दिया जाता है, और यदि कोई आखिरी के केवल ५ दिनों का भी व्रत पालन कर लेता है तो उसे सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और अंत में भगवद प्राप्ति होती है। श्रीमद भागवतम में प्रथम स्कन्द के ९वें अध्याय के ३२वें श्लोक से ४४वें श्लोक तक श्रील भीष्...