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Showing posts from March, 2024

वैदिक जीवन शैली बनाम आधुनिक जीवन शैली - भाग २

 इसमें कोई  संदेह नहीं की अब हम वापस वैदिक जीवन शैली को शायद अपना पाए क्योंकि अब हम आध्यात्मिक और पारम्परिक भारतीय जीवन शैली से  इतने दूर आ चुके हैं की अब हमें इसे अपनाने में शर्मिंदगी महसूस होती है ।  अतः अब यह कहना बेकार है की हमें पुनः भारतीय परम्परागत जीवन शैली अपनाना चाहिए या सच कहा जाय तो शायद यह संभव भी न होगा, परन्तु एक बात तो हमें यह भी स्वीकारनी होगी कि आधुनिक जीवन शैली से भी हमारा किसी प्रकार से कल्याण नहीं होने वाला है।  तो क्यों न दोनों में परस्पर सामंजस्य बिठाया जाय और आधुनिक जीवन शैली बिताने के साथ  - साथ हम थोड़े आध्यात्मिक जीवन को भी अपनाये जिससे हम स्वयं अपने आप को और आने वाली पीढ़ी को पतन से बचा पाए। क्योंकि स्वयं भगवान् श्री कृष्ण इस बात की पुष्टि करते हैं, कि यदि कोई थोड़ा भी आध्यात्मिक (भक्तिमार्ग) को अपनाता है तो उसे बड़े से बड़े संकटो से रक्षा हो सकती है और इसमें हमारा कोई नुकसान भी नहीं ।  नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते । स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ॥ 2.40 ॥ इसीलिए भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद ने हमें केव...

महाशिवरात्रि की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं

महाशिवरात्रि की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं । श्रीमद् भागवत में शिव जी का वर्णन आता है किस प्रकार शिवजी एक महान वैश्णव के रूप में भगवान के निरंतर ध्यान में लगे रहते हैं।  वैसे तो शिवजी को आशुतोष के नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ होता है शीघ्र ही प्रसन्न हो जाना ।  वास्तव में शिवजी सबसे प्रसन्न रहते हैं तभी तो वह भूत गण आदी को भी अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करते हैं।  शिवजी अपने आचरण से हमें यह दिखाते हैं यह किस प्रकार से एक व्यक्ति को अपना जीवन जीना चाहिए न केवल भौतिक उपलब्धि बल्कि त्याग वैराग्य तपस्या साधना सभी के मेल जोल हम शिवजी में देखते हैं।  दक्ष प्रजापति के प्रसंग में भी हम देखते हैं की किस प्रकार से माता सती के जब शरीर का त्याग हो जाता है उसके पश्चात शिवजी दक्ष प्रजापति का वध कर देते हैं और ब्रह्मा जी के आने के पश्चात जब उन्हें समझाते हैं तब शिवजी तुरंत ही दक्ष प्रजापति को क्षमा कर देते हैं और उन्हे जीवित कर देते हैं।  हमारे जीवन में शिवजी अपने आचरण से हमें सिखाते हैं कि किस प्रकार से भगवत भक्ति ही एकमात्र हमारा उद्देश्य होना चाहिए जो मनुष्य जीवन को सा...