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श्री श्री राधा अष्टमी - श्रीमती राधारानी का प्राकट्य दिवस

जब राधा और कृष्ण की बात आती है तब सांसारिक दृश्टिकोण से सभी के मन में एक ही प्रश्न उठता है, यदि राधा और कृष्ण प्रेम कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं ? व्यावहारिक दृष्टि से हम सभी को यही लगता है कि जो प्रेम स्त्री और पुरुष इस संसार में करते हैं वही प्रेम राधा और कृष्ण ने किया, पर कभी हमने यह जानने की कोशिश नहीं करते कि इसके पीछे की वास्तविकता क्या है ? जिस सांसारिक स्त्री-पुरुष प्रेम के लिए हमारा समाज स्वयं विरोध करता आया है फिर चाहे वे लैला-मजनू या रोमियो- जूलिएट हो फिर कैसे वही समाज राधा - कृष्ण के इस अनैतिक प्रेम को इतना दिव्य मानेगा? वास्तव में इस संसार में वास्तविक प्रेम है ही नहीं, वो तो बस काम है जो स्त्री-पुरुष को एक-दूसरे को बाँध के रखता है।  वास्तविक प्रेम तो राधा और कृष्ण ने किया जिसकी महानता को हम आज भी स्वीकार करते हैं।  श्रीमती राधारानी कोई साधारण स्त्री नहीं है अपितु स्वयं भगवान श्री कृष्ण की आह्लादिनी शक्ति हैं और उनमें और कृष्ण में कोई अंतर् नहीं है, वे दो शरीर और एक प्राण हैं।  श्रीमती राधारानी के प्राकट्य का इतिहास अगर हम देखें तो सब कुछ स्पष्ट हो जायेगा कि ...