गुरु शब्द संस्कृत के गु तथा रु की संधि है जिसका अर्थ है अंधकार से प्रकाश की ओर। गुरु हमें अंधकार अर्थात अज्ञानता से प्रकाश अर्थात ज्ञान के मार्ग पर ले आते हैं। गुरु का एक और अर्थ होता है जिसका मतलब बहुत ही भारी, वास्तव में गुरु शब्द की सही- सही व्याख्या कर पाना बहुत दुर्लभ है। पर गुरु इतने दयालु एव्ं कृपालु होते हैं कि हम जैसे पतितो के उद्धार हेतु इस दुःख भरे संसार में आते हैं और हमें इस भव सागर से निकालकर अध्यात्मिक मार्ग पर ले कर आते हैं। सही मायने में हम गुरु के ऋण से कभी भी मुक्त नही हो सकते हैं, पर यदि हम गुरु के बताए गए मार्ग पर दृढ़ता पूर्वक चलते हैं तो गुरु सदैव हमारे ऊपर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। गुरु वासत्व में भगवान् का प्रतिनिधि होते हैं, और उन्हे भगवान् से कम नही समझना चाहिए। शास्त्रों में तो यहाँ तक कहा गया है कि जो गाय को पशु, भगवान् के विग्रह को मूर्ति, और गुरु को साधारण व्यक्ति समझता है वह घोर नरक गामी होता है। आइए हम सभी इस गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अपने- अपने गुरुदेव के चरणों में प्रार्थना करें जिससे वे सदैव हमारा मार्गदर्शन करें और हमें तमोग...