पितृ पक्ष को लेकर बहुत सारी भ्रांतिया लोंगो में पायी जाती है, कई बार लोग इस बात को लेकर भयभीत हो जाते हैं तो कई बार लोग इसे अनदेखा कर देते हैं की यह मात्र अन्धविश्वास है और कुछ भी नहीं। पर हमारा वैदिक् शास्त्र हर वस्तु को प्रमाणिकता के साथ सत्यापित करता है कोई भावुकता से नहीं। पितृ पक्ष में श्राद्ध करना अर्थात पितरों को भोजन प्रदान करना जो की भगवान् विष्णु के यज्ञ के माध्यम द्वारा संपन्न किया जाता है और यह केवल वर्ष में एक बार ही किया जा सकता है। श्राद्ध वेदों के अनुयायियों द्वारा मनाया जाने वाला एक कर्मकांड है। यह पन्द्रह दिनों का एक वार्षिक अवसर होता है जब कर्मकांड के द्वारा दिवंगत आत्माओं को आहुति देने के सिद्धांत का पालन किया जाता हैं। इस प्रकार वे अपने पूर्वज, जिनके पास अभी भौतिक भोग के लिए स्थूल शरीर नहीं मिला है और वे पितृलोक में है , वे अपने वंशजों द्वारा श्राद्ध की क्रिया से फिर से नया शरीर प्राप्त कर सकते हैं। श्राद्ध भारत में अभी भी मौजूद है, विशेष रूप से गया में, जहां एक प्रसिद्ध मंदिर जहाँ भगवान् विष्णु के चर...