हमारे वैदिक ग्रंथो में हर वस्तु को बड़ी ही स्पष्टता के साथ बताया गया है, यदि हम गहराई से इन शास्त्रों को देखते हैं तो हम संसार की हर वस्तुओं को ठीक - ठीक समझ पाने में सक्षम होंगे। श्रीमद भागवतम के तीसरे स्कन्द के २२वे अध्याय में स्वम्भू मनु और कर्दम मुनि के संवाद का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है, कैसे स्वम्भू मनु अपनी पुत्री देवहुति के विवाह का प्रस्ताव लेकर कर्दम मुनि के पास जाते हैं। कर्दम मुनि हजारों वर्षों की तपस्या से जिन्होंने भगवान् श्री विष्णु का दर्शन किया निराहार होने के कारण उनका शरीर जीर्ण लग रहा था वस्त्र गंदे हो चुके थे परन्तु उनका तेज उगते सूर्य की भांति चमक रहा था। कर्दम मुनि के पास न तो कोई धन था, न ही कोई महल पर उसके बावजूद भी विश्व के चक्रवर्ती सम्राट स्वम्भू मनु अपने पुत्री के लिए उन्हें चुन रहे थे क्योंकि वे जानते हैं की उनकी पुत्री के लिए कोई धनवान, ऐश्वर्यवान पति नहीं अपितु सामान गुण वाले चरित्रवान, ज्ञानवान, तपस्वी भगवान् का भक्त चाहिए जो गृहस्थ में रहकर भी घर को आश्रम जैसा पवित्र बनाये। जैसा की आज के समाज में बिल्कुल इसके विपरीत दर्शन...