आधुनिक समाज में श्रमिकों तथा पूजीपतियों में सदैव एक बड़ा झगड़ा चलता रहता है। यह झगड़ा अंतराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच गया है। पूजीपतियों तथा श्रमिकों में स्वामित्व जताने की होड़ में एक दूसरे से कुत्ते-बिल्लियों जैसे लड़ने की प्रवित्ति देखि गयी है। और इस प्रकार से समाज में कभी भी शांति नहीं हो सकती, जब तक हर एक व्यक्ति संसार की प्रत्येक वस्तुओं पर अपना अधिकार जताने का प्रयास करता रहेगा। ईशोपनिषद का यह शब्द 'ईशावास्य ' अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है और हर किसी को यह जानना चाहिए की संसार की प्रत्येक वस्तु पर एकमात्र केवल भगवान् श्री कृष्ण का अधिकार है और भगवान ने जो हमें प्रदान किया है केवल उतने भाग को ग्रहण करते हुए हमें संतुष्ट रहकर अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए , और यदि प्रत्येक व्यक्ति इस सिद्धांत को अपने जीवन में उतारता है तो वह सदैव प्रसन्न और सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। सामायन्तः समाज में हम देखते हैं कि मनुष्य अत्यधिक संचय करने की होड़ में रहता है और इस प्रकार वह जाने - अनजाने दूसरे की संपत्ति को भी चुरा लेता है और पाप का भागीदार बनता है, श्रील प्रभुपाद इसका उदाहरण उपदेशामृत में भी प्रस्...