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Showing posts from March, 2023

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का प्राकट्य - श्री राम नवमी

श्रीमद भगवदगीता में जैसा भगवान् श्री कृष्ण स्वयं घोषणा करते हैं कि, जब भी अधर्म बढ़ने लगता और धर्म का क्षय होने लगता हैं तब वे स्वयं साधु पुरुषों की रक्षा करने, दुष्टों का विनाश करने और फिर से धर्म की स्थापना करने इस पृथ्वी पर प्रकट होते हैं।  भगवान् ऐसे अनेको बार तथा अनेको रूपों में प्रकट  हुए हैं यथा, वामन, नरसिंह, वराह, मत्स्य, कूर्म और उनको किसी सांसारिक जीव की भांति अपने पूर्व कर्मों के कारण किसी माता के गर्भ में आना नहीं होता अपितु वे स्वयं अपनी इच्छा से आते हैं, इसलिए भगवान् भगवद गीता के ४. ९ में अर्जुन से कहते हैं; जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः । त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥ ४. ९ ॥ हे अर्जुन ! जो व्यक्ति मेरे जन्म एवं कर्म को दिव्य मानता है वह फिर से इस भव् रूपी संसार के चक्र से छूटकर मेरे धाम में सदा के लिए निवास करता है।  भगवान् श्री राम के चरित्र से हम देखते हैं की भले ही वे एक साधारण मनुष्य की लीला कर रहे हैं पर कोई भी सांसारिक जीव ऐसा कर पाने में अक्षम है।  आइये राम नवमी के इस पावन अवसर पर भगवान् श्री राम के चरित्र से कुछ ...

कर्दम मुनि और माता देवहूति - एक आदर्श गृहस्थ

श्रीमद भागवतम के तीसरे स्कन्द के २०वे अध्याय में जब मैत्रेय मुनि और महाराज विदुर का संवाद होता है, तब वहां स्वम्भू मनु और कर्दम ऋषि के प्रसंग की चर्चा होती है।  उसी चर्चा में स्वम्भू मनु के संतान अर्थात तीन पुत्रियों (आकूति, देवहुति और प्रसूति) और दो पुत्रों का वर्णन (उत्तानपाद और प्रियव्रत) का वर्णन आता है।  स्वम्भू मनु अपनी सुंदर और सुशील पुत्री देवहुति के लिए वर ढूढ़ने निकलते हैं तभी उनकी भेंट कर्दम मुनि से होती है जो पूर्ण रूप से तपस्या में लीन रहते हैं जिसके कारण उनका शरीर दुर्बल और वस्त्र पूर्ण रूप से मैले हो गए रहते हैं।  पर राजा स्वम्भू मनु उन्हें देखकर समझ जाते हैं कि इनसे श्रेष्ठ उनकी पुत्री के लिए कोई वर इस पृथ्वी पर नहीं होगा और इस प्रकार उन्हें अपनी पुत्री देवहुति के लिए विवाह का प्रसताव स्वीकार करने के लिए कहते हैं।  एक आदर्श गृहस्थ जीवन का उदाहरण प्रस्तुत करने वाले  कर्दम मुनि और माता देवहूति ने सभी प्रकार के शास्त्र उक्त आचरण किये, जिनसे न केवल उनके जीवन में शांति, प्रसन्नता और सुख प्राप्त हुआ बल्कि उन्हें पुत्र के रूप में भगवान् श्री कपिल की प्र...