श्री कृष्ण पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान और सभी आध्यात्मिक और भौतिक जगत के स्रोत कहे जाते हैं। श्री कृष्ण की दो शक्तियाँ मुख्यतया आध्यात्मिक तथा भौतिक जगत के लिए कार्य करती हैं; भौतिक जगत बहिरंगा शक्ति द्वारा तथा आध्यात्मिक जगत अन्तरंगा शक्ति द्वारा संचालित होता है। जैसा की श्रीमदभागवतम में कहा गया है कि यह भौतिक जगत आध्यात्मिक जगत का एक चौथाई भाग है इसका अर्थ है कि आध्यात्मिक जगत भौतिक जगत से ज्यादा विस्तारित है और इसलिए भौतिक जगत से ज्यादा जिम्मेदारी आध्यात्मिक जगत की है और वह जिम्मेदारी श्रीमती राधारानी अपने ऊपर लेती है। श्रीमती राधारानी केवल और केवल भगवान् श्री कृष्ण की सेवा में रहती है और उनका कोई अन्य कार्य नहीं है, और जो कुछ भी भक्ति हम श्री कृष्ण के लिए कर पा रहें है वह केवल और केवल एकमात्र राधारानी की क़ृपा है। वैसे भगवान् करोडो कामदेवों को मात देते हैं पर श्रीमती राधारानी अपनी मधुर मुस्कान से उनको मात दे देती हैं। श्रीमती राधारानी कोई और नहीं अपितु भगवान् की ही शक्ति स्वरूपा है और वे महाराज वृषभान और माता कृतिदा की पुत्री रूप में रावल में उन्हें प्राप्त हुई। स्...