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भगवान द्वारा ब्रह्माजी को चतुःश्लोकी भागवत का ज्ञान

वैसे तो श्रीमदभागवतम में कुल मिलाकर बारह स्कन्द एवं अठारह हजार श्लोक हैं और हर एक स्कन्द में भगवान् श्री कृष्ण एवं उनके भक्तो और साथ ही साथ सृष्टि के प्राकट्य, जीवों की उत्पत्ति एवं भौतिक प्रकति उसका प्रलय एवं भगवान् एवं उनके नित्य धाम का वर्णन हमें प्राप्त होता है। पर इसी ज्ञान को भगवान् श्री कृष्ण ने सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्मा जी को केवल मात्र चार श्लोकों में वर्णित किया। इसका वर्णन हमें श्रीमद् भागवतम के दूसरे स्कन्द के ९वें अध्याय २.९.३३ से २.९.३६ श्लोक तक प्राप्त होता है।  इसी चार श्लोकों में ब्रह्मा जी को सम्पूर्ण अठारह हजार श्लोकों के ज्ञान प्राप्त हुए।  इस से हम समझ सकते हैं की ब्रह्मा जी कोई साधारण जीव नहीं है अपितु वे सृष्टि के सबसे प्रथम जीव हैं जिन्हे भगवान् श्री कृष्ण ने सृष्टि की सृजन का कार्य सौपा।  ब्रह्मा जी भौतिक दृष्टिकोण से तो उच्च पद पर आसीन है ही उसके पश्चात वे अध्यातिक स्तर पर भी भगवान् के शुद्ध भक्त है।  ब्रह्मा जी भगवान् श्री कृष्ण से सभी भौतिक शक्तियों को प्राप्त करके सृष्टि का सृजन करते हैं।  वास्तव में भगवान् पहले से ही सृष्ट...