मुंबई की बारिश—एक ऐसा अनुभव जो शायद ही कोई न किया हो। जब भी आकाश से बारिस गिरते हैं, तो हर किसी का अपना एक अलग ही एहसास होता है। किसी के लिए भी यह सुहावना मौसम लगता है, तो किसी के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि ऐसा क्यों होता है? दरसल, यह भौतिक जगत् द्वंदों (सुख-दुःख, लाभ-हानि) से भरा हुआ है। इसलिए एक ही परिस्थिति किसी के लिए अनुकूल होती है, तो किसी के लिए प्रतिकूल। सुख और दुःख का यह सतत चक्र हमें एक बहुत बड़ी चेतावनी देता है—कि यह संसार हमारे लिए नित्य (हमेशा) रहने का स्थान नहीं है। वो ख़तरे की रात और एक गहरी सीख 4 जुलाई, 2026, शुक्रवार का दिन था। एक बार फिर मुंबई में बारिश हुई, और इस बार ड्रीम की इस नगरी को पूरी तरह हिलाकर रख दिया। ऐसे समय में मुझे श्री प्रभुपाद के वचनों की गहराई से स्मरण हो आया। वे अक्सर कहते थे कि हम भौतिक रूप से कितने भी कठोर हो जाएं, जब तक हम अपने जीवन में भगवान श्री कृष्ण की शरण नहीं लेंगे, तब तक हम न तो सात्विक अर्थों में सुखी हो सकते हैं और न ही पूरी तरह से सुरक्षित हैं। 5 जुलाई की रात, घड़ी में करीब 2 बज रहे थे। बाहरी बारिश...