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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का प्राकट्य - श्री राम नवमी

श्रीमद भगवदगीता में जैसा भगवान् श्री कृष्ण स्वयं घोषणा करते हैं कि, जब भी अधर्म बढ़ने लगता और धर्म का क्षय होने लगता हैं तब वे स्वयं साधु पुरुषों की रक्षा करने, दुष्टों का विनाश करने और फिर से धर्म की स्थापना करने इस पृथ्वी पर प्रकट होते हैं। 

भगवान् ऐसे अनेको बार तथा अनेको रूपों में प्रकट  हुए हैं यथा, वामन, नरसिंह, वराह, मत्स्य, कूर्म और उनको किसी सांसारिक जीव की भांति अपने पूर्व कर्मों के कारण किसी माता के गर्भ में आना नहीं होता अपितु वे स्वयं अपनी इच्छा से आते हैं, इसलिए भगवान् भगवद गीता के ४. ९ में अर्जुन से कहते हैं;

जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः ।

त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥ ४. ९ ॥

हे अर्जुन ! जो व्यक्ति मेरे जन्म एवं कर्म को दिव्य मानता है वह फिर से इस भव् रूपी संसार के चक्र से छूटकर मेरे धाम में सदा के लिए निवास करता है। 

भगवान् श्री राम के चरित्र से हम देखते हैं की भले ही वे एक साधारण मनुष्य की लीला कर रहे हैं पर कोई भी सांसारिक जीव ऐसा कर पाने में अक्षम है। 

आइये राम नवमी के इस पावन अवसर पर भगवान् श्री राम के चरित्र से कुछ रोचक तथ्यों को जानते हैं, जो स्वयं बाल्मीकि रामायण द्वारा सत्यापित एवं हमारे संस्थापक आचार्य श्री श्रीमद भक्तिवेदान्त स्वामी श्रील प्रभुपाद द्वारा परंपरागत स्वीकार किया गया है। 

१. भगवान श्री राम छह ऐश्वर्यों से परिपूर्ण - भगवान् का अर्थ जो छह ऐश्वर्यों से परिपूर्ण हो अर्थात ज्ञान, धन, ऐश्वर्य, बल, सुंदरता एवं त्याग जो सारे गुण भगवान् श्री राम में विद्यमान हैं। 

भगवान् श्री राम के इन्ही गुणों में से एक गुण वैराग्य जिसे हम देख पाते हैं कि, जिस माता सीता के लिए उन्होंने इतने आततायी राक्षस राज रावण से युद्ध किया उसी माता सीता को उन्होंने केवल एक धोबी के कहने से त्याग दिया। 

क्या ऐसा त्याग किसी सांसारिक मनुष्य में हो सकता है, भले ही वह कितने ही बड़े त्याग का दिखावा ही क्यों न करे ?

२. भगवान श्री राम एक आदर्श -  आज के लोग किसी सांसारिक जीव को अपना आदर्श मान लेते हैं जो कदाचित कभी भी अपने पद से च्युत हो सकता हैं, खासकर युवा पीढ़ी बॉलीवुड के हीरो - हीरोइन को अपना आदर्श मान बैठते हैं पर शायद वे स्वयं ही वे आचरण न कर पाने में सक्षम होते हैं। 

पर भगवान् श्री राम एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं जो न केवल वचन से अपितु कर्म से भी, फिर चाहे उन्हें १४ वर्षों के लिए वनवास जाना पड़े, पत्नी के लिए रावण से युद्ध करना पड़े, और भरत के लिए अयोध्या का राज्य छोड़ना पड़े। 

३. भगवान श्री राम सभी जीवों के रक्षक - भगवान् राम सभी जीवों की रक्षा के लिए ततपर रहते हैं, बस जीव केवल एक बार आकर उनकी शरण ग्रहण कर ले। 

भगवान् श्री राम किष्किंधा नरेश सुग्रीव से कहते हैं , हे सुग्रीव परम पुरुषोत्तम भगवान् होने के नाते, यह मेरा शाश्वत सिद्धांत है कि जब भी कोई प्राणी मेरी शरण में आकर एक बार कह दे कि, मैं आपका हूँ, तब मैं उसे सभी प्रकार के भय से मुक्त कर देता हूँ।  यदि रावण भी मेरे समक्ष आकर समर्पण करता है तो मैं उसे भी सुरक्षा प्रदान करूँगा। 

भगवान श्री राम एक आदर्श प्रस्तुत कर हम सभी जीवों के लिए मार्गदर्शन और भगवद्धाम जाने का मार्ग प्रसस्त करने आये हैं, यदि जीव सभी छल - कपट को त्याग कर उनकी भक्ति करता हैं  तो निश्चित रूप से वे उसकी सभी प्रकार से रक्षा करेंगे जिस प्रकार उन्होंने विभिषण को लंका का त्याग करने के पश्चात किया इसमें कोई संदेह नहीं। 

आज हमारे देश में श्री राम राज्य वापस से स्थापित होना चाहिए और वह तभी संभव हो सकता है जब प्रत्येक व्यक्ति भगवान् राम के चरित्र को अच्छी तरह अपने जीवन में उतारे।

कलियुग के चकाचोंध भरी जिंदगी से हताश हुए लोग जाने किन - किन वस्तुओं का सहारा ले रहे हैं पर फिर भी उन्हें परम शांति नहीं मिल रही है पर एक बार कोई भगवान् श्री राम का चरित्र सुन लेता है तो वह सदैव शांति का अनुभव करता हैं, ऐसा है प्रभु श्री राम का चरित्र। 

आप सभी को भगवान् श्री राम के प्राकट्य श्री राम नवमी की ढेर सारी शुभकामनाये। 



जय श्री राम, जय हनुमान !


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