महाशिवरात्रि की ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं । श्रीमद् भागवत में शिव जी का वर्णन आता है किस प्रकार शिवजी एक महान वैश्णव के रूप में भगवान के निरंतर ध्यान में लगे रहते हैं।
वैसे तो शिवजी को आशुतोष के नाम से जाना जाता है जिसका अर्थ होता है शीघ्र ही प्रसन्न हो जाना ।
वास्तव में शिवजी सबसे प्रसन्न रहते हैं तभी तो वह भूत गण आदी को भी अपने शिष्य के रूप में स्वीकार करते हैं।
शिवजी अपने आचरण से हमें यह दिखाते हैं यह किस प्रकार से एक व्यक्ति को अपना जीवन जीना चाहिए न केवल भौतिक उपलब्धि बल्कि त्याग वैराग्य तपस्या साधना सभी के मेल जोल हम शिवजी में देखते हैं।
दक्ष प्रजापति के प्रसंग में भी हम देखते हैं की किस प्रकार से माता सती के जब शरीर का त्याग हो जाता है उसके पश्चात शिवजी दक्ष प्रजापति का वध कर देते हैं और ब्रह्मा जी के आने के पश्चात जब उन्हें समझाते हैं तब शिवजी तुरंत ही दक्ष प्रजापति को क्षमा कर देते हैं और उन्हे जीवित कर देते हैं।
हमारे जीवन में शिवजी अपने आचरण से हमें सिखाते हैं कि किस प्रकार से भगवत भक्ति ही एकमात्र हमारा उद्देश्य होना चाहिए जो मनुष्य जीवन को सार्थक बनता है इसीलिए तो शिवाजी हमेशा तपस्या में लीन रहते हैं और भगवान विष्णु भगवान अथवा श्री राम का स्मरण करते रहते हैं।
भगवान श्री राम भी यहां तक कहते हैं कि शिवद्रोही मम दास कहावा सो नर सपने मोहि न भावा अर्थात यदि कोई भगवान श्री राम की भक्ति करता हूं और भगवान शिव से बैर रखना हो तो वह कभी भी भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता और ठीक उल्टा इस प्रकार यदि कोई शिवजी का महान भक्त है पर भगवान विष्णु से बैर रखता हूं वह कभी भी अपने जीवन में सफल नहीं हो सकता ।
इसका ठीक साक्षात उदाहरण हम देखते हैं रावण जो शिवजी का बहुत ही बड़ा उपासक था उसको यही लगा था कि शायद में शिवाजी का उपासक होने के नाते भगवान राम से युद्ध में जीत जाऊंगा लेकिन वह भूल गया की शिव और श्री राम एक दूसरे के पूरक हैं हम एक को अपेक्षित करके दूसरे को प्रसन्न नहीं रख सकते।
इसलिए हमको भगवान की भक्ति करनी है साथ ही साथ हमें शिवजी का सम्मान भी करना है और शिवजी के साथ में यही प्रार्थना करनी चाहिए की है शिव आप भगवान के अनन्य भक्त हैं और आपकी कृपा से हमको भक्ति प्रदान हुई है इसलिए आप हम पर सदैव कृपा बनाए रखें ।
हर हर महादेव
हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

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