हमारा देश भारत सांस्कृतिक पर्वों का देश मना जाता है। यहाँ पर न केवल विविध प्रकार के पर्व मनाये जाते है बल्कि उन पर्वों के पीछे कुछ न कुछ सामाजिक , पारम्परिक, सांसारिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कारण भी हैं।
पर आज शायद हम उन्हें जाने सुने बिना बस केवल एक प्रकार से अपनी इन्द्रियतृप्ति के लिए सभी त्योहारों को मना रहे हैं , जो न केवल समाज को गुमराह कर रहा हैं अपितु हमारी अपनी आस्था को भी ठेस पहुंचाता है।
बिना प्रमाणिकता के बस अपनी सनक वश किसी कार्य को करना यह केवल एक रजोगुण का प्रभाव है, और इस कारन व्यक्ति अपनी संस्कृति, धर्म और आस्था को एक तरफ रखकर केवल दिखावेबाजी में त्योहारों को मना रहा है।
आइये हम सभी दिवाली पर्व के इन सभी पहलुओं पर एक छोटी सी झलक डालते हैं जिससे हमने पता चले कि आखिर हम यह त्यौहार मनाते क्यों हैं ?
पारम्परिक कारण : चूँकि हम सभी भारत भूमि में जन्म प्राप्त किये है इसलिए हमारा यह परम सौभाग्य है कि हमें बचपन से परम्परागत तरीके से इन सभी त्योहारों की छवि बचपन से मिलती आ रही हैं।
सामाजिक कारण : हमारी देश की बहुत ही अच्छी बात जो विविधता में एकता देखने को मिलती है ऐसा शायद ही कोई देश होगा, इसलिए हमने सामाजिक कारणों से भी हर त्योहारों को अपनाते है।
ऐतिहासिक कारण : हर त्यौहार के पीछे कोई न कोई इतिहास छुपा रहता है , जैसे दिवाली हम इसलिए मनाते हैं क्योंकि आज के दिन भगवान् श्री राम ने राक्षस राज रावण का वध करके चौदह वर्षो के पश्चात अयोध्या वापस आये थे और सभी अयोध्यावासी भगवान् श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता का पूरी अयोध्या को दीपक से सजाकर उनका स्वागत करते हैं।
आध्यात्मिक कारण : प्रायः हम सभी जानते हैं कि रावण के ऊपर श्री राम जी ने विजय प्राप्त कर यह समाज को बताया को बुराई चाहे कितनी भी अच्छे के सामने घुटने टेकती है।
पर इस सिद्धांत को समझने के लिए इतना ही पर्याप्त नहीं है अपितु हमें भगवान् श्री रामचंद्र की लीला रामायण से उन कथाओं का श्रवण करना होगा जिनसे हमारे ह्रदय में छुपे अज्ञान रूपी रावण का वध हो सके।
भगवान् श्री राम की कथा न केवल हमारी व्यथा को दूर करती है बल्कि हमारे जीवन में सुख, शांति और सम्बृद्धि प्रदान करती हैं।
आइये हम सभी मिलकर भगवान् श्री राम चंद्र जी के चरणों में उनसे प्रार्थना करें जिससे हमारे जीवन के सभी अमंगल नष्ट हो सके।
जय श्री राम !

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