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जय-जय विट्ठल श्री हरी विट्ठल पांडुरंगा गोविंदा !

महाराष्ट्र प्रदेश में भगवान् श्री कृष्ण के अनन्य भक्त हुए, जिनके अलग - अलग लीलाएं हुयी है, श्री हरी विट्ठल अर्थात भगवान् श्री कृष्ण का एक अद्भुत रूप जो अपने भक्त पांडुरंग के वश में धारण किये, भगवान् भक्तवत्सल हैं और इस बात का प्रमाण वे सदैव देते रहते हैं। 

वे अपने भक्तों के लिए कुछ भी कर सकते हैं, ऐसे ही एक भक्त पुंडलिक हुए जिनकी अनन्य भक्ति के कारण भगवान् श्री कृष्ण स्वयं बैकुंठ धाम से पंढरपुर धाम आये जो की महाराष्ट्र के सोलापुर भीमा और चंद्रभागा नदी तट पर स्थित है।

पंढरपुर धाम को दक्षिण द्वारिका के नाम से भी जाना जाता है, वैसे इस धाम की महिमा शास्त्रों में अनंत है क्योंकि यहाँ पर भगवान् के भक्त संत श्री नामदेव, श्री तुकाराम, श्री पुंडलिक और रमाबाई जैसे महान भक्तों ने भगवान् श्री कृष्ण के साथ भक्ति के द्वारा आदान - प्रदान किया। 

भगवान् के इस अद्भुत रूप के पीछे एक बड़ी ही सुन्दर घटना है, कि किस प्रकार अपने भक्त पुंडलिक के कहने से भगवान् ने वीट अर्थात ईट पर खड़े हुए और उसी रूप में आज भी भक्तों को दर्शन देते हैं। 

ऐसा माना जाता है आज आषाढ़ी एकादशी के दिन भगवान के दर्शन हेतु लाखों की संख्या में भक्त उमड़ पड़ते हैं और भगवान् आज मंदिर के शिखर पर बैठकर भक्तों का दर्शन लेते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि मंदिर की प्रथम सीढ़ी संत श्री नामदेव को अर्पित है, जो कि उन्होंने भगवान् विट्ठल से माँगा था कि आप के सभी भक्त जब दर्शन के लिए आये तो सर्वप्रथम मेरे शरीर से होकर जाएँ जिससे उनके चरणों की रज मैं प्राप्त कर सकूँ। 

वहां विट्ठल रुक्मिणी अर्थात श्री कृष्ण और लक्ष्मी जी के अलावा गोपालपुर, नारद मंदिर, नीरा नरसिंहपुर और मल्लिकार्जुन और श्री श्री राधा पंढ़रीनाथ जैसे अद्भुत और ऐतिहासिक मंदिर हैं।

चन्दभागा नदी के पवित्र जल में स्नान और श्री हरी विट्ठल का दर्शन पाकर बैकुंठ जैसा आनंद प्राप्त होता है, और ऐसे आनंद को प्राप्त कर संसार के सभी कष्टों से छुटकारा पाया जा सकता हैं। 


जय जय श्री राधा पंढ़रीनाथ !

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