आदि शंकराचार्य जी के मतानुसार एक ही शास्त्र होना चाहिए और वह केवल भगवद गीता और एक ही भगवान होने चाहिए केवल भगवान् श्री कृष्ण।
भगवत गीता कोई धार्मिक या सामुदायिक ग्रन्थ नहीं है अपितु यह इन सबसे ऊपर एक आध्यात्मिक योग पद्धति प्रदान करने वाला ग्रन्थ है, जिससे हर व्यक्ति अपने आप को ज्ञान योग, कर्म योग तथा भक्ति योग के माध्यम से सही तरीके से जाने और अपनी असली पहचान के द्वारा वह सही कार्य को करने की प्रेरणा ले।
भगवत गीता का मुख्य उद्देश्य हमें अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश में लाना है, और जैसे ही हम ज्ञान में स्थित हो जाते हैं हम अपने हर कार्य के लिए सही निर्णय ले सकने में सक्षम हो सकेंगे।
आज हर व्यक्ति निणर्य लेने में या तो भ्रमित रहता है, या मनमाने ढंग से निर्णय लेता है जिससे भविष्य में उसे पछताना पड़ता है, पर यदि व्यक्ति भगवद गीता का आश्रय लेता है तो उसे सही बुद्धि के कारण सही निर्णय लेने में आसानी हो जाती है।
भगवत गीता की शिक्षा सभी वर्गों के लिए है फिर चाहे कोई शिक्षक है, विद्यार्थी है, व्यापारी है उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि कहीं न कहीं हर व्यक्ति कभी न कभी जीवन के ऐसे दो राह पर आकर निर्णय लेने में असमर्थ हो जाता है, तब उसे भगवत गीता ही सही मार्ग दर्शन कर सकती है।
भगवत गीता पढ़ने के मुख्य लाभ:
एक प्रकार का यज्ञ (ज्ञान यज्ञ) के रूप में होता है।
भगवत गीता पढाने के मुख्य लाभ:
व्यक्ति को भगवान् श्री कृष्ण की शुद्ध भक्ति प्राप्त होती है, जिससे वह संसार के कष्टों से छुटकारा प्राप्त कर सकता है।
मृत्यु के पश्चात उसे भगवान् के धाम में जाने का अवसर प्राप्त होता है।
वह व्यक्ति भगवान् को अत्यंत प्रिय होता है।
भगवत गीता सुनने के मुख्य लाभ:
व्यक्ति सारे पापों से मुक्त हो जाता है।
उच्च लोकों की प्राप्ति होती है।
इसलिए जीवन में हर व्यक्ति को चाहे वह किसी भी जाति, धर्म अथवा समुदाय का क्यों न हो भगवत गीता एक बार उसे अवश्य पढ़ना अथवा सुनाना चाहिए।
हरे कृष्ण !

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