दीपावली का त्यौहार हमारे देश में बड़े ही उत्सव के साथ मनाया जाता है और यह त्यौहार आज के दिन अर्थात धनतेरस से शुरू होकर पांच दिन तक चलता है।
वैसे ज्यादातर लोग धनतेरस को धन की देवी अर्थात श्री लक्ष्मी देवी की कृपा के लिए ही उनकी पूजा करते हैं पर शायद लोंगो को यह नहीं पता की उस दिन धनवंतरी अर्थात आयुर्वेद के मूर्तिमान स्वरुप स्वयं भगवान् नारायण का प्राकट्य हुआ।
भगवान् धनवंतरी का प्राकट्य समुद्र मंथन से करोडो वर्ष पूर्व हुआ और उन्होंने सम्पूर्ण विश्व को आयुर्वेद विज्ञान का ज्ञान प्रदान किया।
भगवान् धनवंतरी का स्वरुप पितांबर धारण किए एक हाँथ में आयुर्वेद का भंडार लिए सभी को स्वास्थ्य और कल्याण प्रदान करने की मुद्रा में प्रकट हुए।
धनतेरस के दिन, सम्पूर्ण भारत में, शाम के समय, भगवान धन्वंतरि के स्वागत के लिए घर के दरवाजे पर उत्तर-पूर्व की ओर दीपक जलाया जाता है। भक्त इस दिन जीवन में अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशी के लिए भगवान का आशीर्वाद मांगते हैं। भगवान धन्वंतरि नकारात्मकता को नष्ट करते हैं और अपने भक्तों को सभी शुभ आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
धनतेरस के दो दिन बाद आती है दिवाली , यह वह दिन है जब भगवान श्री राम चंद्र माता सीता देवी, अपने अनुज भ्राता लक्ष्मण, और अपने महान भक्त हनुमान रावण की लंका पर जीत हासिल करने की अपनी लीला में अन्य प्रतिभागियों के साथ अयोध्या लौटे थे।
तो आईये हम सभी मिलकर भगवान् धन्वंतरि, भगवान् श्री राम और माता सीता अर्थात साक्षात् लक्ष्मी देवी काआशीर्वाद प्राप्त करें और भक्ति भाव से इस अनोखे त्यौहार का आनंद उठायें।
जय श्री राम !


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