आप सभी को ७५वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आज हमें गर्व होना चाहिए की हमने भारत भूमि पर जन्म पाया है और जो भी इस पावन भूमि पर जन्म लेता है वह कही न कही पवित्र आत्मा होता है और इसी कारण श्री चैतन्य महाप्रभु जो कलियुग में स्वयं श्री कृष्ण के अवतार रूप में प्रकट हुए, कहा है (चैतन्य चरितामृत);
भारत भूमि ते होइलो मनुष्य जन्म जार।
जन्म सार्थक करि, कर पर उपकार।।
अर्थात जो भी मनुष्य भारत भूमि पर जन्म लेता है उसकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि वह दूसरों के प्रति उपकार करें और वह उपकार क्या है?
जो भी हमारे वैदिक काल से चली आ रही परंपरा है उसको बचा कर रखे और दूसरों को भी उसकी शिक्षा प्रदान करें।
आज इस विज्ञान और तकनिकी के आधुनिक युग में हम कही न कही अपनी संस्कृति ,शिष्टाचार , संवेदना, प्रेम, समपर्ण , उदारता और सेवा की भावना को खोते जा रहे हैं और पाश्चात्य जगत की शैली को हम अपना रहे हैं। जिसके कारण न केवल हम एकाकी बल्कि तनावपूर्ण जीवन जी रहे हैं जबकि आज वह सब कुछ है जो शायद हमें पहले प्राप्त नहीं था।
पूर्व काल से ही भारत को सोने की चिड़ियाँ कहा जाता है और वह वास्तविक में था पर शायद आधुनिकता की इस आपा - धापी में हमने अपने महत्वपूर्ण हीरे को फेककर कांच के टुकडे को अपना लिया है।
भारत में न केवल सुख, शांति अपितु ज्ञान का भंडार था जो पुरे विश्व को अपने नियत्रण में रखता है, आज हमारे देश में यदि बात करें तो फिर से श्री राम राज्य की स्थापना हुयी है और एक बार हम पुनः यदि अपने वैदिक शिक्षाओं अर्थात रामायण, महाभारत , श्रीमद भागवतम को अपने जीवन में उतारें तो निश्चित ही हम एक सच्चे रूप में भारतवासी कहलाएंगे।
आइयें हम सभी मिलकर इस राष्ट्र को फिर से उसे रूप में लाएं जो वास्तविक में था।
जय हिन्द जय भारत !

Comments
Post a Comment