किसी दार्शनिक ने कही न कही बहुत ही सुंदर और कटु सत्य कहा था, यदि गाँव बर्बाद हुए , भारत भी बर्बाद हो जायेगा। भारत फिर अपनी वास्तविक छवि को खो बैठेगा।
वास्तव में हमारे गांव में वैदिक पद्धति से जीवन जिया जाता था पर शायद अब वह बात गाँव में नहीं रह गयी। कहने को तो गाँव अब भी है , आज भी मुर्गा सुबह बांग देता है , ठंडी और ताजी हवा आज भी बहती है, प्रदूषण शहरों की तुलना में आज भी गाँव में बहुत कम पाया जाता है ।
किन्तु अब वह भावना नहीं रह गयी, अब गाँव नरक बन चुका है। असली भारत बहुत ही गहरी नीद में सो रहा है। हमारे हृदय से दूसरों के प्रति प्रेम और सद्भावना कोशो दूर चली गयी है। दूसरों पर यहाँ तक की अब परिवार के सदस्यों पर भी विश्वास करना दुर्लभ है जबकि वैदिक काल में लोग दुश्मनों पर भी विश्वास करते थे।
राजनिति जिससे हमारा दूर - दूर तक सम्बन्ध नहीं था, आज हर जगह बीमारी की तरह फ़ैल गयी है। गाँव का जीवन अब ईर्ष्या और द्वेष से भर चुका है, जबकि पहले व्यक्ति जब तक उसका पडोसी भोजन नहीं कर लेता वह स्वयं भोजन नहीं करता और यदि वह भूखा सो रहा है तो पडोसी उसे अपने हिस्से का खिला देता।
ज्यादा धन और वैभव नहीं होते थे फिर भी लोग बीमारी और तनाव से वंचित थे जहाँ आज के दौर में हमारे पास धन की कमी नहीं पर वही पर हर दूसरा व्यक्ति अवसाद, तनाव और गंभीर बीमारी से त्रस्त है। जीवन चल रहा है पर सब तरफ से अस्त, व्यस्त और त्रस्त है।
पहले हमारे दरवाजे अपरिचितों के लिए सदा खुले रहते थे पर आज पड़ोसियों के लिए भी बंद है। हमने अपनी आत्मा खो दी है, केवल खोखले शरीर को ढो रहे हैं।
आज हमारे पास टीवी, मोबाईल, फैशन के कपडे और तमाम तरह की वस्तुंए है जिसके हम कभी सपने देखते थे की यह हमारे लिए अच्छा भविष्य लेकर आएगा, किन्तु वास्तविकता देखा जाय तो हमारा बीता हुआ समय ही बेहतर था।
इन सभी आधुनिक मशीनों को खरीदने से हमें सुख मिलना चाहिए था पर हम अपने सुख और शांति को धीरे - धीरे खो रहे हैं, परिवार में झगडे और तनाव बढ़ रहे हैं, छोटे बड़ो का सम्मान करना बिलकुल भूल ही गए है, रिश्ते औपचारिकता मात्र रह गए हैं ।
पहले संस्कार के लिए बच्चों को गीता, रामायण इत्यादि की शिक्षा दी जाती थी, वही आज फूहड़ बॉलीवुड और हॉलीवुड की फिल्में दिखाई जा रही हैं और स्त्रियां और कुवांरी लड़किया इन अश्लील गानों पर अधनंगे नृत्य कर रही है।
अभी भी समय है यदि हम अपने आपको इस आधुनिकता की दौड़ में रोक नहीं पाए और अपने सनातन संस्कृति को नहीं अपनाये तो केवल हम ही नहीं हमारी आने वाली पीढ़ी भी बर्बाद हो जाएगी।

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